Ram Mandir प्राण प्रतिष्ठा में सीता रसोई के लिए बिहार से Ayodhya जाएंगे बर्तन, एक लाख लोगों का महाप्रसाद बनेगा।

Ram Mandir के लिए बिहार की यात्रा

Ram Mandir प्राण प्रतिष्ठा में सीता रसोई के लिए बिहार से Ayodhya जाएंगे बर्तन, एक लाख लोगों का महाप्रसाद बनेगा।

भारत में स्थित ऐसी जगह है , जहां माता सीता की रसोई, चूल्हा-चिमटा समेत हर सामान को रखा गया है बहुत ही संभालकर।देशभर में लोगों को बस इंतजार है तो ,राम की नगरी में रामलला के नए मंदिर बनने की, लेकिन आज के इस आर्टिकल में हम आपको माता सीता से जुड़ी हुई एक बहुत ही खास जगह के बारे में बताएंगे। डिटेल में जाने:
सीता रसोई कहां पर है?

Ram Mandir के लिए बिहार की यात्रा

करीब 500 साल लंबे विवाद के बाद अब अयोध्या में यहभव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है. एक विवाद का अंत हुआ और एक नए युग का शुरुआत हो चुका है. रामभक्तों को बस इंतजार है तो, राम की नगरी में रामलला के अपने नए मंदिर में विराजमान होने का. आज आपको राम मंदिर से जुड़े एक ऐसे तथ्य के बारे में बताते हैं जिसे ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं. दरअसल राम मंदिर के फैसले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीता की रसोई का जिक्र किया गया था. आखिर क्या है सीता माता की रसोई और राम मंदिर को लेकर इसका क्या महत्व है. चलो जाने,

दरअसल, सीता की रसोई अपने नाम के मुताबिक कोई विशेष रसोई घर नहीं है. बल्कि ये राम मंदिर परिसर में ही मौजूद हुआ एक मंदिर है. ये मंदिर राम जन्‍म भूमि के उत्‍तरी – पश्चिमी हिस्से में मौजूद है. इस मंदिर में भगवान श्रीराम, लक्ष्‍मण, भरत और शत्रुघ्‍न और उन सभी की पत्नियों सीता, उर्मिला, मांडवी और सुक्रिर्ति की मूर्तियों से सजाया गया एक अनोखा और विशेष मंदिर है.

Ram Mandir के लिए बिहार की यात्रा

Sita Rasoi: ये रसोई घर है या मंदिर? क्या सच में सीता खाना बनती थी? जानिए हकीकत:

इस मंदिर में प्रतीकात्‍मक तौर पर रसोई के बर्तन रखे गए हैं. जिनमें या चकला और बेलन के अलावा रसोई में इस्तेमाल के दूसरे बर्तन रखे गए हैं. दरअसल पुराने रिवाज के मुताबिक घर में आई नई वधु रस्म के तौर पर परिवार के सभी लोगों के लिए खाना तैयार करती थी.

हालांकि कहा जाता है कि माता सीता ने ये रस्म नहीं की थी. लेकिन इस रसोई का महत्व माता अन्नपूर्णा के मंदिर जैसा ही विशाल है.

मान्यता है कि सीता माता ने भी इस रसोई में पंच ऋषियों को भोजन करवाया था. इसलिए माता सीता समस्त लोक की अन्‍नपूर्णा कहलानी हैं.

रसोई के अलावा अयोध्या में सीता माता का जानकी कुंड भी भक्तों के लिए काफी अहम है. अयोध्या में रामघाट पर मौजूद जानकी कुंड के बारे में प्रचलित है कि माता सीता इसी कुंड में स्नान करते आती थीं।

 

माता सीता जी का भोजन क्या है?

जानकारों का मानना है कि, इस सीता रसोई में तीन तरह की खीर, मटर घुघुरी, कढ़ी, मालपुआ आदि परोसा जाता था। इस रसोई के बगल में एक जानकी कुंड भी स्थित है। जिसे लेकर कहा जाता है कि सीता इसी कुंड में स्नान करती थी।

 

राम जी और सीता माता का विवाह :

इस मंडप में विवाह पंचमी के दिन पूरी रीति-रिवाज से राम-जानकी का विवाह किया गया है। जनकपुरी से १४ किलोमीटर ‘उत्तर धनुषा’ नामक स्थान है। बताया जाता है कि रामचंद्र जी ने इसी जगह पर धनुष तोड़ा था। पत्थर के टुकड़े को अवशेष कहा जाता हैं। पूरे वर्षभर ख़ासकर ‘विवाह पंचमी’ के अवसर पर तीर्थयात्रियों का तांता लगा रहता हैं। नेपाल के मूल निवासियों के साथ ही अपने देश के बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान तथा महाराष्ट्र राज्य के अनगिनत श्रद्धालु नज़र आते हैं। जनकपुर में कई अन्य मंदिर और तालाब हैं। प्रत्येक तालाब के साथ अलग-अलग कहानियाँ जुड़ी हुई हैं। ‘विहार कुंड’ नाम के तालाब के पास ३०-४० मंदिर हैं। यहाँ एक संस्कृत विद्यालय तथा विश्वविद्यालय भी है। विद्यालय में छात्रों को रहने तथा भोजन की निःशुल्क व्यवस्था है। यह विद्यालय ‘ज्ञानकूप’ के नाम से जाना जाता है।

 

मंडप के चारों ओर चार छोटे-छोटे ‘कोहबर’ हैं जिनमें सीता-राम, माण्डवी-भरत, उर्मिला-लक्ष्मण एवं श्रुतिकीर्ति-शत्रुघ्र की मूर्तियां हैं। राम-मंदिर के विषय में जनश्रुति है कि अनेक दिनों तक सुरकिशोरदासजी ने जब एक गाय को वहां दूध बहाते देखा तो खुदाई करायी जिसमें श्रीराम की मूर्ति मिली थी। वहां एक कुटिया बनाकर उसका प्रभार एक संन्यासी को सौंपा था, इसलिए अद्यपर्यन्त उनके राम मंदिर के महन्त संन्यासी ही होते हैं जबकि वहां के अन्य मंदिरों के वैरागी हैं।

 

इसके अतिरिक्त जनकपुर में अनेक कुंड हैं यथा- रत्ना सागर, अनुराग सरोवर, सीताकुंड इत्यादि है। उनमें सर्वप्रमुख है प्रथम अर्थात् रत्नासागर जो जानकी मंदिर से करीब 9 किलोमीटर दूर ‘धनुखा’ में स्थित है। वहीं श्रीराम ने धनुष-भंग किया गया था। कहा जाता है कि वहां प्रत्येक पच्चीस-तीस वर्षों पर धनुष की एक विशाल आकृति बनती है जो आठ-दस दिनों तक दिखाई देती है।

 

मंदिर से कुछ दूर ‘दूधमती’ नदी के बारे में कहा जाता है कि ,जुती हुई भूमि के कुंड से उत्पन्न शिशु सीता को दूध पिलाने के उद्देश्य से कामधेनु ने जो धारा बहायी, उसने उक्त नदी का रूप धारण कर लिया।

Ram Mandir का प्राण प्रतिष्ठा कब है?

Ayodhya में बन रहे भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होन वाली है।

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